म्यूचुअल फंड के रास्ते लोगों की बचत का पैसा शेयरों में पहुंचा है

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भारतीय पूंजी बाजार में भी एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। म्‍यूचुअल फंड इंडस्‍ट्री इसकी एक बड़ी वजह है। म्‍यूचुअल फंड कंपनियों के संगठन एम्‍फी ने बात बोली है कि लोगों की छोटी बचत का पैसा शेयरों और बॉन्‍ड में पहुंचाने के लिए भी उनकी काफी भूमिका है।

उसके बाद एम्‍फी के चेयरमैन नीलेश शाह ने ये बोला, ‘कि लोग म्‍यूचुअल फंड सिप की मदद से शेयरों में निवेश कर रहे हैं। इससे भारतीय शेयर बाजारों को भी मजबूती मिल गई है। इसने विदेशी संस्‍थागत निवेशकों पर अधिक निर्भरता को भी कम कर दिया है। इससे बाजार में भी संतुलन बना रहता है।

एम्‍फी का कहना है कि म्‍यूचुअल फंडों में अभी केवल 2 करोड़ लोग निवेश कर रहे हैं. इस तरह इसमें ग्रोथ की काफी क्षमता है. भारतीय म्‍यूचुअल फंड बाजार काफी बढ़ सकता है. हाल में एम्‍फी ने अपने 25 साल पूरे किए हैं।

संगठन ने ये बोला, ‘कि इस टाइम उसने इनवेस्‍टर एजुकेशन को फैलाने के लिए, फाइनेंशियल इनक्‍लूजन तैयार करने के लिए, कैपिटल मार्केट को बढ़ाने के लिए, इंडस्‍ट्री में ग्‍लोबल तौर-तरीकों को लाने के लिए, कॉरपोरेट गवर्नेंस को सुधारने के लिए और ट्रांजेक्‍शन की कॉस्‍ट घटाने के लिए उन सब में उनकी अहम भूमिका है।

इसके अलावा इसने 2.25 लाख प्रत्‍यक्ष रोजगार बनाने में भी मदद की है। अप्रत्‍यक्ष तौर पर भी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के साथ लाखों लोग थे वो सभी काम कर रहे हैं। इनमें कस्‍टोडियन, इंटरमीडिएरी और काफी सारी सेवा भी प्रदाता शामिल हैं।

जैसे जीएसटी के तौर पर सरकार के टैक्‍स में म्‍यूचुअल फंड इंडस्‍ट्री का बड़ा योगदान है। वैसे ही इक्विटी मार्केट ट्रांजेक्‍शन पर लागू सिक्‍योरिटी ट्रांजेक्‍शन टैक्‍स की मदद से सरकार को काफी टैक्‍स मिलता है।

एम्‍फी के चीफ एग्‍जीक्‍यूटिव एनएस वेंकटेश ने बोला, ‘कि म्‍यूचुअल फंड सही है’ जैसे सफल मीडिया कैंपेनों से इसकी पहुंच छोटे-छोटे निवेशकों तक बढ़ाने में मदद दी है वैसे ही पहले से ही ये इंडस्‍ट्री मुख्‍य रूप से शहरों तक सीमित थी।

एम्‍फी की शुरुआत अगस्‍त 1995 में हुई थी। तब उनके सदस्‍यों की संख्‍या लगभग 15 थी। अब 44 सदस्‍य हैं। ये 27 लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा के एसेट का प्रबंधन करते हैं।

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